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मुक्तक

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          मुक्तक वीर वलिदानियो की जुबानी लिखो। देश के दुर्दसा की कहानी लिखो। जब लिखो तब किसी पर  मुरव्वत नही, दूध  का दूध पानी  का पानी  लिखो। सत्य  झुठ की मण्डी में न बिकने पाये। अपने आँगन लालच  भी न टिकने पाये। मार्ग  बदल दें नदियाँ  पर्वत डिग  जायें, लेकिन अपनी कलम कभी न झुकने पाये। कलम किसी की चाटुकारिता कभी नही कर सकती है। झूँठो  के मस्तक पर  सच का ताज  नही धर  सकती है। कलम से जो भी टकराया वह चकना चूर  हुआ लेकिन, कलम अमर है शाश्वत है यह कभी नही मर सकती है। अब्दुल हमीद की परिपाटी नही देंगे, फूलों की अपनी वह घाटी  नही देंगे। चाहे नाक रगडो पाक  से हिंदुस्तान तक, कश्मीर की इन्च भर माटी  नही देंगे। मोहब्बत जिससे होगी उसको अपनी जान  लिख देंगे। उसी के नाम अपने दिल के सब अरमान लिख देगें। हमें विश्वास  है जिस दिन जरुरत देश को होगी, ये बढ़कर  शत्रु के सीने  पे हिंदुस्तान लिख देंगे। समर्पित राष्ट्र पर  होकर के नव निर्माण  देतें हैं। कोई भी क्षेत्र हो यह अप...

सीधी उंगली से कभी घी निकलता नहीं है - कवि शिव कुमार व्यास

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                                                                                                                                                                                       कवि शिव कुमार व्यास    अपनी पुरानी है परम्परा सदा से यही, पहले तो शत्रु को भी प्यार से मनाते हैं। किन्तु जब झूठे दम्भ से वो बाज आता नहीं, तब उसे सत्यता का आइना दिखाते हैं। धर्म पंथ का सदैव ही किया अनुसरण, कभी भी नहीं अधर्म पथ अपनाते हैं। युद्ध जब दिखता समक्ष हो ...

पटेल पत्र -

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                      ~पटेल पत्र~ गोरों ने जब घायल करके भारत का भूगोल दिया। वीर प्रसूता वसुधा ने तब लौह पुरुष अनमोल दिया। जिसने माँ को द्रवित देख हो संकल्पित प्रण ठाना था। बिखरे माला के मोती सब एक सूत्र में लाना था। चिंतन करके पत्र लिखा घर रजवाड़ों के छोड़ा था। वह पत्र नहीं ऐसा लगता की अश्वमेध का घोड़ा था। जैसे जैसे हर रजवाड़ा चिट्ठी खोल रहा था। अक्षर अक्षर लौहपुरुष का पौरुष बोल रहा था। विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर अपनी लाज बचा लो। वर्ना दुष्परिणाम झेलने का मन्तव्य बनालो। सोचो जिस दिन भारत में ही पाँच सौ बासठ देश बनेगें। कितनी सीमाएं होगीं और कितने यहाँ नरेश बनेगें। तमिल नाडु से जम्मू की यात्रा आसान नहीं होगी। किस देश के वासी हो इसकी पहचान नहीं होगी। और अयोध्या से चल कर जब सेतु समुद्रम जाओगे। तब बोलो कितने देशों से तुम वीजा बनवाओगे। आज नही यदि जागे आगे भागों में भी भाग बटेंगे। जैसे पाक बटा है वैसे विस्मिल व अश्फाक बटेगें। पवित्र गौतमी व गंगा का बहता पवन नीर बटेगा। प्राणों से भी प्यारा हमको कच्क्ष और कश्मीर बटेगा। पुरख...

सरदार पटेल संस्थान बाराबंकी द्वारा आयोजित पटेल जयंती समारोह 2020 एवं ऑनलाईन कवि सम्मेलन

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    सरदार पटेल संस्थान बाराबंकी द्वारा आयोजित पटेल जयंती समारोह 2020 एवं ऑनलाईन कवि सम्मेलन मुख्य अतिथि - मा. मुकुट बिहारी वर्मा सहकारिता मंत्री उ.प्र. शासन अध्यक्षता - मा.धीरेन्द्र कुमार वर्मा अध्यक्ष सरदार पटेल संस्थान बाराबंकी   अखण्ड भारत के शिल्पी, भारत रत्न, लौहपुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल जी की 145-वी जयंती पर "सरदार पटेल संस्थान बाराबंकी" द्वारा पूर्व की भांति आयोजित "पटेल जयंती समारोह" को कोविड-19 से सम्बंधित सुरक्षा निर्देशों व आम जनमानस के हित को ध्यान में रखते हुए विगत वर्षों से थोड़ा अलग हटते हुए,31अक्टूबर2020 को प्रातः 8 बजे से सरदार पटेल भवन पटेलनगर बाराबंकी स्थिति "सरदार पटेल श्रद्धा समर्पण स्थल (पटेल-प्रतिमा) पर माल्यार्पण/पुष्पांजलि का वृहत कार्यक्रम रखा गया...जिसमे भारी संख्या में जनप्रतिनिधियों/समाजसेवियों व गणमान्य जनों ने प्रतिभाग किया...सभी का आभार... तदोपरांत सायं 4 बजे से कवि डॉ अम्बरीष अम्बर जी के संयोजन/संचालन व कवि शिवकुमार व्यास जी के व्यवस्थापन में "ऑन लाइन कवि सम्मेलन"का आयोजन sardar patel sansthan barabanki के face...

एक शाम शहीदों के नाम : पटना कवि सम्मेलन

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                                     एक शाम शहीदों के नाम   एक शाम शहीदों के नाम' कार्यक्रम का आयोजन सीएम नीतीश कुमार कार्यक्रम में हुए शामिल

लिपट तिरंगे में शरहद से – शिव कुमार ‘व्यास’

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  लिपट तिरंगे में शरहद से – शिव कुमार ‘व्यास’                                                                                                                                                 ( विकास बनाम शहीद ) लिपट तिरंगे में सरहद से बेटे जब घर आते हैं। तब कविता के अक्षर अक्षर में शोले भर जाते हैं। जब की उनको संगीनों का बोल बदलना आता है। अपने दुश्मन का सारा भूगोल बदलना आता है। हाथ खोल दो सैनिक के तो शक्ति भैरवी जागेगी। न तो बांस बचेगा कोई ना ही बाँसुरी बाजेगी। नागफन...