मुक्तक
मुक्तक वीर वलिदानियो की जुबानी लिखो। देश के दुर्दसा की कहानी लिखो। जब लिखो तब किसी पर मुरव्वत नही, दूध का दूध पानी का पानी लिखो। सत्य झुठ की मण्डी में न बिकने पाये। अपने आँगन लालच भी न टिकने पाये। मार्ग बदल दें नदियाँ पर्वत डिग जायें, लेकिन अपनी कलम कभी न झुकने पाये। कलम किसी की चाटुकारिता कभी नही कर सकती है। झूँठो के मस्तक पर सच का ताज नही धर सकती है। कलम से जो भी टकराया वह चकना चूर हुआ लेकिन, कलम अमर है शाश्वत है यह कभी नही मर सकती है। अब्दुल हमीद की परिपाटी नही देंगे, फूलों की अपनी वह घाटी नही देंगे। चाहे नाक रगडो पाक से हिंदुस्तान तक, कश्मीर की इन्च भर माटी नही देंगे। मोहब्बत जिससे होगी उसको अपनी जान लिख देंगे। उसी के नाम अपने दिल के सब अरमान लिख देगें। हमें विश्वास है जिस दिन जरुरत देश को होगी, ये बढ़कर शत्रु के सीने पे हिंदुस्तान लिख देंगे। समर्पित राष्ट्र पर होकर के नव निर्माण देतें हैं। कोई भी क्षेत्र हो यह अप...