मुक्तक
मुक्तक
वीर वलिदानियो की जुबानी लिखो।
देश के दुर्दसा की कहानी लिखो।
जब लिखो तब किसी पर मुरव्वत नही,
दूध का दूध पानी का पानी लिखो।
सत्य झुठ की मण्डी में न बिकने पाये।
अपने आँगन लालच भी न टिकने पाये।
मार्ग बदल दें नदियाँ पर्वत डिग जायें,
लेकिन अपनी कलम कभी न झुकने पाये।
कलम किसी की चाटुकारिता कभी नही कर सकती है।
झूँठो के मस्तक पर सच का ताज नही धर सकती है।
कलम से जो भी टकराया वह चकना चूर हुआ लेकिन,
कलम अमर है शाश्वत है यह कभी नही मर सकती है।
अब्दुल हमीद की परिपाटी नही देंगे,
फूलों की अपनी वह घाटी नही देंगे।
चाहे नाक रगडो पाक से हिंदुस्तान तक,
कश्मीर की इन्च भर माटी नही देंगे।
मोहब्बत जिससे होगी उसको अपनी जान लिख देंगे।
उसी के नाम अपने दिल के सब अरमान लिख देगें।
हमें विश्वास है जिस दिन जरुरत देश को होगी,
ये बढ़कर शत्रु के सीने पे हिंदुस्तान लिख देंगे।
समर्पित राष्ट्र पर होकर के नव निर्माण देतें हैं।
कोई भी क्षेत्र हो यह अपना झन्डा गाड़ देते है।
इन्हे बच्चे समझ मत इनकी ताकत को चुनौती दो,
यही बनकर भरत सिंहो के जबड़े फाड़ देते हैं।
मोहब्बत में चना लोहे का भी यह फोड देतें हैं।
कहे यदि प्यार से कोई तो घर तक छोड देतें हैं।
मगर षणयंत्र रचता है कोई इनके लिये तो फिर,
यही अभिमन्यु बनके व्यूह उसका तोड़ देतें हैं।
अगर पुस्तक है कविता की तो मुक्तक छन्द भी होगें।
खिलेगें फूल मधुवन में तो फिर मकरंद भी होगें।
अरे विश्वास करके देखिये इन नव जवानों पर ,
इन्ही मे गान्धी भी होगें विवेका नन्द भी होगें।
ना देखो तन बुजुर्गों का न रखो ध्यान आयु का।
यही अशीष देतें हैं सदा हमको शतायु का।
इन्ही का त्याग वा बलिदान हमको पथ दिखता है,
समय हो तो पढ़ो पौरुष कभी बूढ़े जटायू का।
शिव कुमार व्यास बाराबंकी।
सियासत की ये मदिरा है नशे में चूर मत होना।
लिया संकल्प जो उससे कभी तुम दूर मत होना।
हवा तोड़कर मर्यादा तुफान जगा सकती है।
लहर भटकती पथ से सारा शहर भगा सकती है।
ओ शाहीन बाग में बैठे छद्म राष्ट्र दीवानों,
घर की चिंगारी ही घर में आग लगा सकती है।
वीर वलिदानियो की जुबानी लिखो।
देश के दुर्दसा की कहानी लिखो।
जब लिखो तब किसी पर मुरव्वत नही,
दूध का दूध पानी का पानी लिखो।
सत्य झुठ की मण्डी में न बिकने पाये।
अपने आँगन लालच भी न टिकने पाये।
मार्ग बदल दें नदियाँ पर्वत डिग जायें,
लेकिन अपनी कलम कभी न झुकने पाये।
कलम किसी की चाटुकारिता कभी नही कर सकती है।
झूँठो के मस्तक पर सच का ताज नही धर सकती है।
कलम से जो भी टकराया वह चकना चूर हुआ लेकिन,
कलम अमर है शाश्वत है यह कभी नही मर सकती है।
अब्दुल हमीद की परिपाटी नही देंगे,
फूलों की अपनी वह घाटी नही देंगे।
चाहे नाक रगडो पाक से हिंदुस्तान तक,
कश्मीर की इन्च भर माटी नही देंगे।
मोहब्बत जिससे होगी उसको अपनी जान लिख देंगे।
उसी के नाम अपने दिल के सब अरमान लिख देगें।
हमें विश्वास है जिस दिन जरुरत देश को होगी,
ये बढ़कर शत्रु के सीने पे हिंदुस्तान लिख देंगे।
समर्पित राष्ट्र पर होकर के नव निर्माण देतें हैं।
कोई भी क्षेत्र हो यह अपना झन्डा गाड़ देते है।
इन्हे बच्चे समझ मत इनकी ताकत को चुनौती दो,
यही बनकर भरत सिंहो के जबड़े फाड़ देते हैं।
मोहब्बत में चना लोहे का भी यह फोड देतें हैं।
कहे यदि प्यार से कोई तो घर तक छोड देतें हैं।
मगर षणयंत्र रचता है कोई इनके लिये तो फिर,
यही अभिमन्यु बनके व्यूह उसका तोड़ देतें हैं।
अगर पुस्तक है कविता की तो मुक्तक छन्द भी होगें।
खिलेगें फूल मधुवन में तो फिर मकरंद भी होगें।
अरे विश्वास करके देखिये इन नव जवानों पर ,
इन्ही मे गान्धी भी होगें विवेका नन्द भी होगें।
ना देखो तन बुजुर्गों का न रखो ध्यान आयु का।
यही अशीष देतें हैं सदा हमको शतायु का।
इन्ही का त्याग वा बलिदान हमको पथ दिखता है,
समय हो तो पढ़ो पौरुष कभी बूढ़े जटायू का।
शिव कुमार व्यास बाराबंकी।
सियासत की ये मदिरा है नशे में चूर मत होना।
लिया संकल्प जो उससे कभी तुम दूर मत होना।
हवा तोड़कर मर्यादा तुफान जगा सकती है।
लहर भटकती पथ से सारा शहर भगा सकती है।
ओ शाहीन बाग में बैठे छद्म राष्ट्र दीवानों,
घर की चिंगारी ही घर में आग लगा सकती है।
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