कवि शिव कुमार व्यास अपनी पुरानी है परम्परा सदा से यही, पहले तो शत्रु को भी प्यार से मनाते हैं। किन्तु जब झूठे दम्भ से वो बाज आता नहीं, तब उसे सत्यता का आइना दिखाते हैं। धर्म पंथ का सदैव ही किया अनुसरण, कभी भी नहीं अधर्म पथ अपनाते हैं। युद्ध जब दिखता समक्ष हो ...
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